उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिकी निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड

UTTAR PRADESH STATE HORTICULTURE EXPORT PROMOTION BOARD (UPSHEB)


उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिकी निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड (UPSHEB) की प्रथम बैठक एवं निर्यात प्रोत्साहन कार्यशाला का लखनऊ स्थित उद्यान निदेशालय में दीप प्रज्ज्वलन कर शुभारंभ किया। ||उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिकी निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड की द्वितीय बैठक उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री दिनेश प्रताप सिंह के अध्यक्षता में संपन्न हुई।
Yogi Adityanath

Yogi Adityanath

Hon’ble Chief Minister, Uttar Pradesh

Shri Dinesh Pratap Singh

Shri Dinesh Pratap Singh

Minister of State (Independent Charge), Horticulture, Agricultural Marketing, Agricultural Foreign Trade and Agricultural Exports

Shri Babu Lal Meena

Shri Babu Lal Meena

Additional Chief Secretary

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(Apeda Website)

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Online Registration
(E Mandi)

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UPSHEB Registeration
(Import/Export/FPO/FPC)

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प्रोत्साहन - निर्देशालय उद्यान विभाग उत्तर प्रदेश

  • प्रदेश में औद्यानिक क्लस्टर उत्पादन क्षेत्र/प्रसंस्करण क्षेत्र का मानकीकरण करना, जिसमें निर्यात मात्रा, निर्यात गंतव्य, उपज एवं उत्पादों की पहचान तथा नए निर्यात बाजारों की खोज शामिल है।
  • बुनियादी ढाँचा एवं लॉजिस्टिक मानकों का प्रवर्तन।
  • बागवानों, उत्पादक समूहों एवं प्रसंस्करणकर्ताओं को निर्यात प्रक्रियाओं, लाइसेंस एवं प्रमाणन की जानकारी देकर उनका क्षमता निर्माण करना।
  • हितधारकों का सफल निर्यात गंतव्यों पर भ्रमण कराकर प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण।
  • प्रदेश की बागवानी उपज एवं प्रसंस्कृत उत्पादों का ब्रांडिंग कर वैश्विक पहचान स्थापित करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय स्वीकार्यता के लिए गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिसेज (GAPs) को बढ़ावा देना।
  • फूड सेफ्टी एवं क्वालिटी मैनेजमेंट सिस्टम्स अपनाने हेतु कृषकों को प्रोत्साहित करना; आम, अमरूद, केला, स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी एवं सब्जियों को विशेष प्रोत्साहन।
  • अंतर्राष्ट्रीय मांग के अनुसार आवश्यक बीज एवं इनपुट का आयात।
  • किसानों तक निर्यात के वैश्विक अवसरों की जानकारी डिजिटल व IEC माध्यमों से पहुँचाना।
  • ताजे फलों व सब्जियों के निर्यात हेतु रोग और कीट-मुक्त क्षेत्रों तथा समुद्री प्रोटोकॉल के विकास के लिए संस्थानों के बीच समन्वय।
  • विदेश व्यापार नीति–2023 के अंतर्गत, ‘‘मलिहाबाद’’ की तर्ज पर नए टाउन ऑफ एक्सपोर्ट एक्सीलेंस विकसित करना एवं कृषि निर्यात नीति योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराना।

उत्तरदायित्वः

  • एपीडा द्वारा रीजनल फूड रिसर्च एनालिसिस सेंटर, लखनऊ को निर्यात प्रमाण पत्र निर्गत करने हेतु अधिकृत किया जाना — औद्यानिक उपज एवं प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात हेतु एपीडा के मानक के अनुसार आवश्यक प्रमाणपत्र (Certificate of Registration, Phytosanitary Certificate आदि) निर्गत करने के लिए केंद्र को अधिकृत कराया जाएगा ताकि अनावश्यक विलंब से बचा जा सके तथा ताजा उत्पाद शीघ्र विदेशी बाज़ारों में पहुँच सकें।
  • निर्यात प्रोत्साहन केन्द्र बनाना — उत्तर प्रदेश के बावतपुर, अमौसी एवं जेवर हवाई अड्डों को निर्यात प्रोत्साहन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि कार्गो के माध्यम से गुणवत्ता युक्त औद्यानिक उपज एवं प्रसंस्कृत उत्पादों को विदेशी बाजारों में पहुँचाकर अधिक लाभ प्राप्त किया जा सके।
  • औद्यानिक फसलों के उत्पादन क्लस्टर तैयार करना एवं मैपिंग/रूट चार्ट बनाना — वाराणसी, लखनऊ एवं जेवर को केंद्र बिंदु बनाकर इनके आसपास के 6-6 मंडलों को क्लस्टर इकाई मानते हुए "One District One Crop" मॉडल पर आधारित उत्पादन क्लस्टर बनेंगे। प्रत्येक क्लस्टर का क्षेत्रफल, फसल, परिवहन मार्ग, दूरी आदि का रूट चार्ट तैयार किया जाएगा।
  • निर्यात प्रोत्साहन हेतु लॉजिस्टिक्स एवं इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना — तीनों मुख्य एअरपोर्ट के आसपास मुख्य सड़कों/एक्सप्रेसवे/राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बड़े पैक हाउस एवं प्रसंस्करण इकाइयाँ विकसित की जाएंगी ताकि क्लस्टर क्षेत्रों से लाई गई उपज को वैल्यू एडिशन कर वैश्विक निर्यात मानकों के अनुरूप तैयार किया जा सके।
  • निर्यात परामर्श केन्द्रों की स्थापना — विभिन्न देशों में औद्यानिक उत्पादों की मांग, गुणवत्ता, फाइटोसेनीटरी मानक, क्वारनटाइन, निर्यात अवसर, GAP प्रथाएँ, पोषण प्रबंधन, ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन आदि की जानकारी देने हेतु APEDA/संस्थाओं/निजी संस्थाओं द्वारा निर्यात परामर्श केंद्र स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, "Bank of Export Data" भी बनाया जाएगा।
  • देशी प्रजातियों का प्रोत्साहन — विदेशों में भारतीय देशज प्रजातियों की उच्च मांग को देखते हुए विभिन्न फलों एवं सब्जियों की देशी प्रजातियों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि विभाग, उद्यान विभाग, कृषि विश्वविद्यालय एवं निजी बीज विक्रेताओं द्वारा GAP आधारित उत्पादन एवं बीज उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाएगी। देशी प्रजातियों के लिए बीज बैंक स्थापित किए जाएँगे।
  • बायर-सेलर मीट — चिन्हित क्लस्टर क्षेत्रों में फसलवार हितधारकों का प्रशिक्षण, एक्सपोज़र विजिट, चैंबर ऑफ कॉमर्स के सहयोग से बायर-सेलर मीट आयोजित की जाएगी।
  • नोडल विभाग एवं फंड व्यवस्था — राज्य औद्यानिकी निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड का नोडल विभाग "उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उत्तर प्रदेश" होगा। फंड की व्यवस्था APEDA, कृषि विभाग, उद्यान विभाग, मंडी परिषद, कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार विभाग, तथा UP Export Promotion Policy तथा अन्य योजनाओं के कन्वर्जेंस से की जाएगी।
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