उत्तर प्रदेश राज्य औद्यानिकी निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड

UTTAR PRADESH STATE HORTICULTURE EXPORT PROMOTION BOARD (UPSHEB)

About Us

प्रस्तावना

UPSHEB - Horticulture Export Promotion Board

उत्त्तर प्रदेश, भारत का 5वां सबसे बड़ा और अधिक आबादी वाला राज्य है। जनसंख्या की दृष्टि से चीन शेष भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका एवं इण्डोनेशिया के बाद उत्तर प्रदेश 5 वें स्थान पर है। प्रदेश अन्र्तगत कुल 18 मण्डल एवं 75 जनपदों का होना इसके व्यापक विस्तार का परिचायक है।

भौगोलिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश एक भू-बद्ध राज्य है जो मध्य प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, उत्तराखण्ड तथा नेपाल से चतुर्दिक घिरा हुआ है।

भारतवर्ष को कुल 15 कृषि जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है और उत्तर प्रदेश राज्य कृषि जलवायु क्षेत्र 04 मध्य गंगा मैदानी क्षेत्र, कृषि जलवायु क्षेत्र 05 ऊपरी गंगा मैदानी क्षेत्र, कृषि जलवायु क्षेत्र 08 मध्य पठार एवं पहाड़ी क्षेत्र में आता है। उत्तर प्रदेश 09 कृषि जलवायु क्षेत्र में विभाजित किया गया है जो क्रमशः तराई क्षेत्र, पश्चिमी मैदानी क्षेत्र, मध्य पश्चिमी मैदानी क्षेत्र, पश्चिमी अर्द्ध शुष्क मैदानी क्षेत्र, मध्य पश्चिमी दक्षिण मैदानी क्षेत्र, दक्षिण-पश्चिमी अर्द्ध शुष्क मैदानी क्षेत्र, बुन्देलखण्ड क्षेत्र, उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र, विन्ध्य क्षेत्र हैं। इस प्रकार उत्तर प्रदेश राज्य विभिन्न औद्यनिक फसलों के उत्पादन हेतु अनुकूल जलवायु से समृद्ध है तथा पूरे वर्ष भर औद्यानिक फसलों का उत्पादन होता है।

वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य को देश की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था का दर्जा प्राप्त है। निर्यात की दृष्टि से उत्तर प्रदेश देश में 5वें स्थान पर है। कृषि उत्पादों के निर्यात में उत्तर प्रदेश राज्य लम्बी छलांग लगाते हुए आन्ध्रप्रदेश एवं पश्चिम बंगाल को पीछे छोड़ते हुए देश में तीसरे स्थान पर पहुंच गया है। अब कृषि निर्यात के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश राज्य से आगे मात्र महाराष्ट्र एवं गुजरात राज्य हैं। विगत एक वर्ष में कृषि निर्यात के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश को साढ़े तीन हजार करोड़ रूपये से अधिक की अतिरिक्त वृद्धि (18.62ः) प्राप्त हुई है जो एक कीर्तिमान है।

उत्तर प्रदेश से वित्तीय वर्ष 2022-23 में रू0 18991.45 करोड़ के विभिन्न कृषि उत्पादों का निर्यात किया गया था जो वित्तीय वर्ष 2023-24 में बढ़कर रू0 22528.56 करोड़ पहुंच गया है। ताजा फल एवं सब्जियां, प्रसंस्कृत फल एवं सब्जी, पुष्पों के निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि के फलस्वरूप इनके निर्यात की अपार सम्भावनाएं/अवसर स्पष्ट रूप से परिलक्षित हो रहा है।

अवसर

राज्य की जलवायु उपोष्ण कटिबन्धीय है तथा कृषि के लिए अनुकूल है। राज्य में चार पारिस्थितिक क्षेत्र हैं जिनमें तराई, गंगा का मैदान, भाभर एवं विंध्य क्षेत्र शामिल हैं। वर्षा भू-भाग एवं मिट्टी की विशेषताओं के आधार पर उत्तर प्रदेश में नौ अलग-अलग कृषि जलवायु क्षेत्र हैं। इस प्रकार उत्तर प्रदेश राज्य विभिन्न औद्यनिक फसलों के उत्पादन हेतु अनुकूल जलवायु से समृद्ध है तथा पूरे वर्ष भर औद्यानिक फसलों का उत्पादन होता है। गंगा एवं उसकी सहायक नदियों से समृद्ध होने के कारण यहां आम, केला, पपीता, अमरूद, बेर, बेल एवं आंवला तथा आलू, टमाटर, बैंगन, मिर्चा एवं कद्दू वर्गीय सब्जियां, हल्दी आदि अनेक अन्य फल एवं सब्जी बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं। किसानों की आय द्विगुणित करने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए यह आवश्यक है कि न केवल राष्ट्रीय स्तर पर बल्कि अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर औद्यानिक उत्पादों के बेहतर मांग का सृजन किया जाए तथा निर्यात में वृद्धि के माध्यम से बेहतर आय अर्जन सुनिश्चित की जाए। वर्ष 2023 में वैश्विक स्तर पर निर्यात व्यापार में कृषि क्षेत्र में $ 51 बिलियन के साथ भारत आठवें स्थान पर है। देश के प्रमुख निर्यात गन्तव्य-संयुक्त राज्य अमेरिका, बांग्लादेश, चीन, संयुक्त अरब अमीरात, इण्डोनेशिया है

उद्देश्य

  • निर्यात प्रोत्साहन हेतु समस्त हितधारकों के मध्य समन्वय स्थापित कराना – निर्यात से सम्बन्धित विभिन्न हितधारकों के मध्य समन्वय स्थापित करने के उद्देश्य से निदेशक, उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण की अध्यक्षता में त्रैमासिक बैठक का आयोजन कराना।
  • निर्यात प्रोत्साहन हेतु लिंकेज का चिन्हीकरण – बैकवर्ड एवं फारवर्ड लिंकेज के माध्यम से औद्यानिक उपज एवं प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात के प्रोत्साहन का कार्य।
  • निर्यात मांग के अनुरूप गुणवत्ता मानक – निर्यातक देशों की अभिरूचि के अनुसार औद्यानिक उपज एवं प्रसंस्करण के गुणवत्ता-मानकों से हितधारकों को भिज्ञ कराते हुए निर्यात को बढ़ाना एवं नए अवसरों की खोज करना।
  • वार्षिक कार्य-योजना का निर्माण – बोर्ड द्वारा निर्यात प्रोत्साहन हेतु वार्षिक कार्य-योजना तैयार कर शासन एवं माननीय उद्यान मंत्री को प्रस्तुत किया जाएगा तथा उनके मार्गदर्शन में उद्यान विभाग एवं अन्य विभागों के अभिसरण से बजटीय एवं कार्यात्मक योजना का निर्माण।
  • विविध – समय-समय पर उच्च स्तर से प्राप्त निर्देशों के अनुपालन में अन्य आवश्यक कार्य।
  • प्रदेश के बागवानी उपज एवं प्रसंस्कृत उत्पादों की अंतर्राष्ट्रीय स्वीकार्यता हेतु प्रमाणन प्रक्रियाओं (Certifications) को प्रोत्साहित करना।
  • दीर्घकालिक निर्यात बढ़ाने हेतु वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य GAP (Good Agricultural Practices) प्रमाणन को अंगीकृत करने के लिए कृषकों को प्रोत्साहित करना। GAP प्रमाणन के अंतर्गत आम, अमरूद, केला, स्ट्रॉबेरी, ब्लूबेरी एवं सब्जियों को शामिल कर कम लागत में अधिक उत्पादन एवं कृषक आय में वृद्धि सुनिश्चित करना।
  • अंतर्राष्ट्रीय मांग के अनुसार निर्यात हेतु बागवानी फसलों के उत्पादन के लिए आवश्यक बीज एवं अन्य इनपुट का आयात करना।
  • प्रदेश के बागवानी उपज एवं प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात के वैश्विक अवसरों की जानकारी कृषकों तक पहुँचाने के लिए डिजिटल माध्यमों एवं सूचना–शिक्षा–संचार (IEC) सामग्री का उपयोग।
  • ताजे फलों एवं सब्जियों के निर्यात हेतु रोग एवं कीट मुक्त क्षेत्रों तथा लंबी दूरी के समुद्री प्रोटोकॉल के विकास के लिए सम्बंधित अनुसंधान संस्थाओं एवं विश्वविद्यालयों के बीच समन्वय स्थापित करना।
  • भारत सरकार की विदेश व्यापार नीति–2023 के अंतर्गत निर्यात प्रदर्शन के आधार पर प्रदेश में "मलिहाबाद" की तर्ज पर अनेक "Town of Export Excellence" विकसित करना तथा भारत सरकार की RoDTEP एवं TMA योजनाओं के लाभ उपलब्ध कराना।

उत्तरदायित्व

  • एपीडा द्वारा रीजनल फूड रिसर्च एनालिसिस सेंटर, लखनऊ को निर्यात प्रमाण पत्र निर्गत करने हेतु अधिकृत किया जाना — औद्यानिक उपज एवं प्रसंस्कृत उत्पादों के निर्यात हेतु एपीडा के मानक के अनुसार आवश्यक प्रमाणपत्र (Certificate of Registration, Phytosanitary Certificate आदि) निर्गत करने के लिए केंद्र को अधिकृत कराया जाएगा ताकि अनावश्यक विलंब से बचा जा सके तथा ताजा उत्पाद शीघ्र विदेशी बाज़ारों में पहुँच सकें।
  • निर्यात प्रोत्साहन केन्द्र बनाना — उत्तर प्रदेश के बावतपुर, अमौसी एवं जेवर हवाई अड्डों को निर्यात प्रोत्साहन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा ताकि कार्गो के माध्यम से गुणवत्ता युक्त औद्यानिक उपज एवं प्रसंस्कृत उत्पादों को विदेशी बाजारों में पहुँचाकर अधिक लाभ प्राप्त किया जा सके।
  • औद्यानिक फसलों के उत्पादन क्लस्टर तैयार करना एवं मैपिंग/रूट चार्ट बनाना — वाराणसी, लखनऊ एवं जेवर को केंद्र बिंदु बनाकर इनके आसपास के 6-6 मंडलों को क्लस्टर इकाई मानते हुए "One District One Crop" मॉडल पर आधारित उत्पादन क्लस्टर बनेंगे। प्रत्येक क्लस्टर का क्षेत्रफल, फसल, परिवहन मार्ग, दूरी आदि का रूट चार्ट तैयार किया जाएगा।
  • निर्यात प्रोत्साहन हेतु लॉजिस्टिक्स एवं इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना — तीनों मुख्य एअरपोर्ट के आसपास मुख्य सड़कों/एक्सप्रेसवे/राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बड़े पैक हाउस एवं प्रसंस्करण इकाइयाँ विकसित की जाएंगी ताकि क्लस्टर क्षेत्रों से लाई गई उपज को वैल्यू एडिशन कर वैश्विक निर्यात मानकों के अनुरूप तैयार किया जा सके।
  • निर्यात परामर्श केन्द्रों की स्थापना — विभिन्न देशों में औद्यानिक उत्पादों की मांग, गुणवत्ता, फाइटोसेनीटरी मानक, क्वारनटाइन, निर्यात अवसर, GAP प्रथाएँ, पोषण प्रबंधन, ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन आदि की जानकारी देने हेतु APEDA/संस्थाओं/निजी संस्थाओं द्वारा निर्यात परामर्श केंद्र स्थापित किए जाएंगे। साथ ही, "Bank of Export Data" भी बनाया जाएगा।
  • देशी प्रजातियों का प्रोत्साहन — विदेशों में भारतीय देशज प्रजातियों की उच्च मांग को देखते हुए विभिन्न फलों एवं सब्जियों की देशी प्रजातियों के उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा। कृषि विभाग, उद्यान विभाग, कृषि विश्वविद्यालय एवं निजी बीज विक्रेताओं द्वारा GAP आधारित उत्पादन एवं बीज उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाएगी। देशी प्रजातियों के लिए बीज बैंक स्थापित किए जाएँगे।
  • बायर-सेलर मीट — चिन्हित क्लस्टर क्षेत्रों में फसलवार हितधारकों का प्रशिक्षण, एक्सपोज़र विजिट, चैंबर ऑफ कॉमर्स के सहयोग से बायर-सेलर मीट आयोजित की जाएगी।
  • नोडल विभाग एवं फंड व्यवस्था — राज्य औद्यानिकी निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड का नोडल विभाग "उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, उत्तर प्रदेश" होगा। फंड की व्यवस्था APEDA, कृषि विभाग, उद्यान विभाग, मंडी परिषद, कृषि विपणन एवं विदेश व्यापार विभाग, तथा UP Export Promotion Policy तथा अन्य योजनाओं के कन्वर्जेंस से की जाएगी।